हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हिस्टरी इन हिन्दी पार्ट 1 हेअब से इंशाल्लाह नबी हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के वक़ीयत आएँगे…नही पारहा तो क्लिक करे इब्लिस की तारीख.

आप की पएदइश का वक़ीया अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने फरमाया.

“बेशाक़ हमने तुम्हारे असल आदम को मिट्टी से पएडा किया”
(ताज़किरात उल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-50)
ज़िस्म ए हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के लिए मिट्टी ली गयी, और रूह कब्ज करने के लिए हज़रत इज़राल अलयहेसलाम ही क्यू आते हे :-अगर आप को आर्टिकल अच्छा लगा तो इस आड पर क्लिक कर्जे हमारी इमदाद करे जज़कल्लाह
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के जिस्म अतर की तखलिक के लिए मिट्टी लाने के लिए हज़रत ज़ीबराल अलयहेसलाम को ज़मीन पर भेजा गया,
आप जब तसरिफ लाए तो ज़मीन से मिट्टी लेने का इरादा किया तो ज़मीन ने बड़ी आज़िज़ी से अर्ज़ किया.
“मेरी मिट्टी से बननेवाले शक्षो ने अगर खून-रेजिया की या वो जराहम की वजह से जहन्नम मे गये तो मूज़े तकलीफ़ होगी”

हज़ीबराल अलयहेसलाम ज़मीन की आज़िज़ी को देइखह कर वापिश चले गये, और

अल्लाह ता’आला को तमाम मांजरा बया कर दिया, इस तरह इसरफिल अलयहेसलाम भी आकर वापिश चले गये, और मिकैल अलयहेसलाम भी आकर वापिश चले गये, उन के बाद इज़राल अलयहेसलाम आए.
उनकी खिडमद मे भी ज़मीन ने वही आज़िज़ना गुफ्तगू की, लेक़िन आप ने कहा की मे तेरी बात तसलीम करू, या अल्लाह ता’आला के हुक़म पर अमल करू…??
मूज़े अल्लाह ता’आला का हुक़म हे इसलिए मेने तो मिट्टी ज़रूर ही ले कर जाना हे, आप ने ज़मीन की आज़िज़ी की तरफ कोई तवज्जो नही दी.
बल्क़ि इर्साद बारी ता’आला के मुताबिक ज़मीन से मिट्टी ले कर रब ता’आला की बारगाह मे हाजिर हो गये,
इस वजह से अल्लाह ता’आला ने रूह कब्ज करना भी उनके(हज़रत इज़राल अलयहेसलाम) सुपुर्द किया की.
आयशा ना हो की ज़ीबराल, मिकैल, इसरफिल, अलयहेसलाम मेसए किशी के ज़िम्मे लगाया तो रूह कब्ज करने के लिए जाए तो उसकी इकरबा को रूट हुए पा कर इस तरह चौड़ कर ना आजाए.
(तफ़सीरे अज़ीज़ी, शाह अब्दुल अज़ीज़ मोहड्दिश् दहेलवी रहमतुल्लाह अले, साफा-207,ताज़किरात उल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-51)

 ज़मीन पर नहरो और चास्मो की पएदइश

अल्लाह ता’आला ने जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम  को पएडा करने का इरादा फरमाया तो ज़मीन को बताया की मे तुज से अपनी एक मखलूक पएडा करनेवाला हू.
जो मेरी मूत’अइया होंगे उनको मे जन्नत मे दाखिल करूँगा और जो मेरे ना-फरमान होंगे उनको मे जहन्नम की आग मे डाल दूँगा,
ये सुन कर ज़मीन ने फिर पूछा आय अल्लाह मुजसे पएडा होनेवाली मखलूक जहन्नम की आग मे जाएँगे…??

                      रब्ब ता’आला ने फरमाया हा..

तो ज़मीन इतना रोई की उस के रोने से चस्मे जारी हो गये जो क़यामत तक जारी रहेंगे.(तफ़सीर सावाइल जललें, जिल्द-1, साफा-49,ताज़किरात उल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-51)
अगर आप को आर्टिकल अच्छा लगा तो इस आड पर क्लिक कर्जे हमारी इमदाद करे जज़कल्लाह
अल्लाहू अकबेर,हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम पर हवारीन का ईमान लाना हिन्दी
केशी मिट्टी ली गयी,और इंशान के जिस्म के रंग मे फ़र्क क्यू.
हज़रत अबू मूसा आस’अरी रादियल्लाहो ता’आला अनहो से हदीस मरवी हे हदीस ए नाबावी
“बेशाक़ अल्लाह ता’आला ने हुक्म दिया की तमाम ज़मीन से एक मिट्टी ले आओ, इस मिट्टी मे हर किस्म की जररट किए गये सुर्क रंग, सुफेद रंग, सिया रंग
और उनके दरमियाँ रंग वाली मिट्टी ली गयी, इस तरह कुछ मिट्टी नरम ज़मीन से ली गयी, और कुछ शाक्त से,
एयशे ही तीब वा खबीस मिट्टी को समिल किया गया, जितनी किस्म के रंगो वाली मिट्टी आप के जिस्म मे लगाई गयी,
आप की औलाद मे इतने ही रंग पाए जाते हे, और इस तरह कोई नरम दिल और कोई शाक्त दिल, कोई नेयक और कोई बुरा
बाज़ हज़रतने बयान किया की हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की मिट्टी मे 60 किस्म के रंग सामिल थे वो तमाम आप की औलाद मे पाए जाते हे”.(ताज़किरात उल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-51)

इंशन को खुशी कम और गम ज़्यादा क्यू

हज़रत इज़राल अलैहिस्सलाम जब मिट्टी को लाए तो उन्हे अल्लाह ता’आला ने हुक्म दिया की इशे साफा वा मरवा पहाड़ियो के पास रखड़ो(यानी वाहा रखड़ो जहा आज काबा श्रीफ हे)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम स्टोरी इन हिन्दी पार्ट 2 स्टार्ट हो रहा हे
फिर फरिश्तो को हुक़म दिया की उशे मुख़्टेलफ पानी से गरहा बनाए, फिर उस पर 40 रोज बारिश हुई, 39 दिन तो गम वा रंज का पानी बर्षा और एक दिन खुशी का, इस लिए इंशन को रंज वा गम ज़्यादा रहता हे, और खुशी कम,
फिर इशे(मिट्टी को) मुख़्टेलफ हवओ से खुसक करके ख्टकनेवाली मिट्टी बना कर अल्लाह ता’आला ने खुद अपनी क़ुद्रट कमेला से कालीब को तैयार किया.(तफ़सीर अज़ीज़ी, साफा-207,ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-52)
हज़रत आदम अलैहिस्सलामकी सूरत देइखह कर फरिश्ते हेरान हो गये फरिश्तो ने कभी एयशी सूरत नही देइखही थी वो हेरान हो कर इस के इर्द-गिर्द फिरते थे और इस की खूबसूरती पर ता’अजूब करते थे.
इब्लिश को भी इस की खबेर हो चुकी थी, अभी तक वो मारदुड नही हुआ था, वो भी इस कालीब को देइखह ने आया और इसके गिर्द फिर कर बोला
तुम उस पर ता’अजूब करते हो ये तो अंदर से एक खाली जिस्म हे,जिस्म मे जगह जगह सुराख हे और इस की कमज़ोरी का ये हाल हे.
की अगर भूका हो तो गीर पढ़े और अगर खूब सिर हो जाए तो चल ना सके, इस खाली कालीब से कुछ ना हो सकेगा फिर कहने लगा
हा इसके सीने की बाई तरफ एक बाँध कोठरी हे ये खबेर नही की इस मे क्या हे..?सयद यही लतीफ़ा रबानी की जगह हो जिस की वजह से ये खिलाफत का हक़्क़दर हुआ हो.
(ताज़किरात उल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-52)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के कालीब मे रूह का दखल होना अल्लाह ता’आला ने रूह को हुक्म दिया की इस कालीब मे दाखिल हो जा और तमाम हिस्सो मे फेल जा,
जब रूह कालीब के पास पहॉंची तो जिस्म को तंग-वा-तारिक़(तंग वा अंधेरी) पाया तो अंडर्ज़ाने से रुक गयी,
बाज़ रिवायत मे आता हे की जब नूरे मुस्तफ़ा सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं से वो कालीब जगमगा दिया गया यानी वो नूवर आदम अलयहेसलाम की पेशानी मे अमानत रखा गया,
अब रूह आइस्ता आइस्ता दखल होने लगी, अभी सर मे थी की आप को छींक आई और ज़बान मे पहॉंची तो आप ने “अल्हंदोलिल्लाह” पढ़ा और
अल्लाह ता’आला ने इस के जवाब मे “यरहंकुल्लाह” कहा और अल्लाह ता’आला ने फरमाया की आय अबू मोहम्मद (अबू अल बसर आप अलयहेसलाम की कुनीयत हे)
मेने तुम्हे अपनी हंड के लिए पएडा किया हे, जब रूह कमर तक पहॉंची तो आपने उतना चाहा, लेकिन आप गिर पड़े क्यूंकी रूह अभी नीचे वेल हिस्से मे नही पहॉंची थी,
अल्लाह ता’आला ने फरमाया
“इंशान जल्द-बाज पएडा किया गया”

फिर रूह तमाम जिस्म मे फेल गयी तो आप को हुक्म हुवा की फारिस्टो को सलाम करो,

आपने कहा     “अस्सलामू अलकूम”
                       फरिश्तो ने जवाब दिया“वलेकुं अस्सलाम”
अल्लाह ता’आला ने फरमाया यही आप के लिए और आप की औलाद के लिए सलाम का तरीका होगा, हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया मेरी औलाद कोन्शी होगी..?
तो आप की तमाम औलाद को आप के सामने कर दिया गया, हदीसे नब्वी नबी ए करीम सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं ने फरमाया
बेशाक़ अल्लाह ता’आला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पएडा फरमाया फिर उनकी पीठ पर अपना दस्ते क़ुद्रट फेयरा और आप की औलाद को नकल जाहिर किया,
फिर फरमाया मेने इनको जन्नत के लिए पएडा किया और ये जन्ञटवालो का अमल करेंगे फिर अल्लाह ता’आला ने अपना दस्ते क़ुद्रट आप की पीठ पर फेयरा.
और आप की बाकी औलाद को जाहेर फरमाया और रब्ब ता’आला ने फरमाया की उन लोगो को जहन्नम के लिए पएडा किया गया हे,
ये जहन्नम वेल अमल करेंगे.(तफ़सीरे ख़ज़िन, जिल्द-1, साफा-46,
ताज़किरात उल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-52, 53)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जुम्मा के दिन पएडा हुए .
हदीसे नबवी  हज़रत अबू हुरेरा रादियल्लाहो ता’आला अनहो फरमाते हे की रासूलाल्लाह सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं ने मेरे हाथ को पकड़ कर फरमाया की
अल्लाह ता’आला ने मिट्टी को पएडा फरमाया (मिट्टी से मुराद ज़मीन हे) और इस मे पहाड़ो को इतवार के दिन पएडा.
फरमाया और दरखतो को पियर के दिन पएडा फरमाया और माक्ृुहाट(मसाहिब वगेरा) को मंगल के दिन पएडा फरमाया.
और कौपाओ को ज़मीन मे जुमेरात के दिन फेलया और हज़रत हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को जुम्मा के दिन असर के बाद तमाम मखलूक के आख़िर मे,
दिन के आख़िरी घड़ी असर से साम तक के दरमियाँ पएडा किया.(तफ़सीर नज़ावमूल फुरकान, जिल्द-2, साफा-563,ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-53)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हदीस ए नब्वी हज़रत अबू हुरेरा रादियल्लाहो ता’आला अनहो फरमाते हे की
हुज़ूर नबी ए अकरम सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं ने फरमाया की
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की लंबाई 60 जरह (यानी 90 फीट) और आप की छोढ़ाई 7 जरह (यानी 10.5 फीट) थी.
(मिस्कट शरीफ,तफ़सीर नाजवाज़ुल फुरक़ान, जिल्द-2, साफा-563, ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-54)अल्लाहू अकबेर
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का इल्म
आप को तमाम चीज़ो का इल्म दिया गया यानी अल्लाह ता’आला ने अपनी तमाम मखलकात मे से एक एक जींस आप को दिखा दी और इसका नाम बता दिया.
मसलन घोड़ा दिखा कर बताया गया की इशे घोड़ा कहते हे और उनत दिखा कर बताया गया की इशे उनत कहते हे इस तरह एक एक चीज़ दिखा कर इस के नाम बता दिए गये.(तफ़सीर अबू अल सौड़, जिल्द-1, साफा-84)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम  को ये खुशिशहियात हासिल थी की आप को तमाम चीज़ो के नाम हर ज़बान मे बता दिए गये थे.
और वही ज़बानी आप की ओवलाद मे पाई जाती हे.(तफ़सीरे मदारिक, साफा-25,ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-46)
यानी एक चीज़ का नाम आपको हर ज़बान मे बताया जो ज़बान मे ईजाद होने थे आप को उनका इल्म पहले ही आता कर दिया गया.
जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को हर चीज़ के नाम हर ज़बान मे शीखाए गये तो सैयदुल अंबिया हुज़ूर नबी ए अकरम सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं के इल्म का मकाम क्या होगा.
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हिस्टरी इन उर्दू हिन्दी पार्ट 3 स्तर हो रहा हे गोर से परहे.
फरिश्ते को हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के सामने सजदा का हुक़म अगर आप ने से पहले पार्ट नही पारहा तो परहले ताकि समाज मे आजए हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइश.
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तखलिक से पहले ही अल्लाह ता’आला ने फरिश्तो को हुक़म दे रखा था की तुम हे मेरे खलिफा के सामने सजदा करना हे, हे.
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तखलिक के बाद फारिस्टो पर तमाम चीज़ो को पेश करके उनके नाम पूछे,
जब फारिस्टो ने अपनी आज़िज़ी का इज़हार कर दिया, तो फिर हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से पूछा आपने तमाम चीज़ो के नाम बता दिए तो फिर हुक़म दिया,

इर्साडे बारी ता’आला हे क़ुरान

“और याद करो जब हमने फारिस्टो को कहा हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को सजदा करो, सबने सजदा किया सिवाय सेितन के उसने इनकार किया और तकबबूर किया और वो काफिरो से हो गया”(सुराह बकरा)
फरिश्तो को सजदा ताज़िमी का हुक़म दिया गया,
हज़रत युसुफ अलैहिस्सलाम के सामने आप के भाइयो ने ताज़ीमा सजदा किया,
हमारे नबी ए करीम सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं की सरीयत मे सजदा ताज़िमी हराम करार दिया गया
इबादत के गार्ज से सजदा सिवाय अल्लाह ता’आला के किशी सरीयत मे जायज़ नही,
“तहाँ फिर भी सबसे पहले सजदा हज़रत ज़ीबराल अलयहेसलाम ने किया फिर मिकैल फिर इसराफिल फिर इज़राल अलयहेसलाम ने फिर तमाम फारिस्टो ने,इस लिए हज़रत जिबराल अलैहिस्सलाम को सबसे बड़ा दर्जा आता किया गया.
यानी अंबीयाए किराम अलयहेसलाम की खिदमत उनके पास वही लाने का अज़ीम कम उनके सुपुर्द हुआ”.(तफ़सीर खज़ानुल)
बाज़ हज़रत ने कहा की सबसे पहले सजदा हज़रत इसरफिल अलयहेसलाम ने किया इस लिए इसकी पेशानी पर सारा क़ुरान सरीफ़ लिख दिया गया.(रूहुल बयान, जिल्द-1, साफा-141)(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-56)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को सजदा करने का सबब क्या था
“मे उस वक्त भी नबी था जब आदम अलयहेसलाम रूह और जिस्म के दरमियाँ थे अगरचे ज़ाहिरी तौर पर सबसे पहले खलिफा हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हे.
लेक़िन दर हक़ीक़ी सबसे पहले खलिफा हमारे नबी ए करीम हुज़ूर मोहम्मद सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं हे.
क्यू की आप का अपना इर्साडे गिरामी ये हे(अबू नईं, तबकाट इबने सायीड,तिब्रानी, जमीउल सग़ीर, जिल्द-2, सफ़र-96)
“हज़रत जिबराल अलैहिस्सलाम अल्लाह ता’आला के हुक़म से नबी ए करीम सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं के रोज़ा ए आनवार की जगह से मिट्टी ली गयी,
आबे तसनीम से उशे गोंडा गया, जन्नत की नहरो मे गौते दिए गये ज़मीनो आसमानो मे फिराया गया.
इस वजह से हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से पहले ही फारिस्टो ने नबी ए करीम सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं को पहेचन लिया था
फिर इस मिट्टी को आदम अलयहेसलाम के जिस्म से मिला दिया गया और नूरे मुहम्मद सललाल्लाहू अलैही वासल्लं से हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पेशानी को चमकाया गया”(तक्ष तफ़सीरे सा’आबी, आज़ खलासतुल तफ़सीर, जिल्द-1, साफा-25)
वही नूरे मुहम्मोआद सल्ल्लाल्लाहू अलैही वासल्लं दरअसल फरिश्तो से सजदा करने का सबब बना था,

इमाम राज़ी रहमतुल्लाह अले ने तफ़सीरे कबीर मे फरमाया

” बेशाक़ फारिस्टो को हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को सजदा करने का हुक़म इस लिए दिया गया.
की आप की पेशानी मे हुज़ूर मोहम्मद सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं का नूवर रखा गया था”(तफ़सीरे कबीर, जिल्द-2, साफा-455)
अल्लामा आलुषी रहमतुल्लाह अले फरमाते हे“यानी दर हक़ीक़त हुज़ूर सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं ही अल्लाह ता’आला की मखलूक मे अल्लाह ता’आला के खलीफा ए आज़म मे.
और ज़मीनो और बुलंद आसमानो मे सबसे मुकद्दम इमाम हुज़ूर सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं ही हे.
अगर मुहम्मद सललाल्लाहू अलैही वासल्लं ना होते तो ना हज़रत आदम अलैहिस्सलामपएडा होते ना इनके अलावा कोई और चीज़”(रूहुल मा’आनी, जिल्द-1, साफा-218)(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-55, 56)

 इब्लिस तकबबूर की वजह से मारदुड हो गया

अल्लाह ता’आला के हुक़म से इनकार की वजह इब्लिश का तकबबूर था, जब रब ता’आला ने उस से पूछा की तूने सजदा क्यू नही किया, हालाँकि मेरा हुक़म था…??तो उसने जवाब देते हुए ये कहा..
“मे उससे बेहतर हू क्यूंकी तूने मूज़े आअग से पएडा किया और उशे मिट्टी से”(सुराह आ’अरफ़)
यानी जो शान के लहज से बड़ा हो वो गत्या के सामने (माज़ाल्लाह) सजदा नही करता,
इब्लिह हक़ीक़त मे हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की शान को समजने से कासिर रहा, उस्शे ये मा’आलम ना हो सका की अल्लाह के नबी की शान फारिस्टो से बुलंद होती हे,
अल्लाह ता’आला ने इर्साद फरमाया“तू जन्नत से निकल जा, तू मारदुड हे और बेशाक़ क़यामत तक तूज़ पर ला’अनत हे”(सुराह हाज्र)
कई सालो तक इबादत करनेवाला रब्ब का मुकर्राब नबी की शान मे गुस्ताख़ी करने से एक पल भर मे मारदुड हो गया,
जन्नत से निकल दिया गया, क़यामत तक ला’अनत का मुस्तहकीक ठहरा दिया गया.(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-58)

 हव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा की पएदइश

जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को फरिश्तो ने सजदा किया और इब्लिश इनकार वा तकबबूर की वजह से मारदुड हो गया तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जो खाक से पएडा हुए थे आपका जन्नत मे कोई हम जिन्श ना था,
क्यूकी फारिस्टो ने अलयहीदाह जिन्श थे इस लिए अल्लाह ता’आला ने आप पर नींद को मुसल्लत किया,
फिर आप की बाई पसली से हज़रत हव्वारादियल्लाहो ता’आला अँहा को पएडा किया और उसकी जगह गोस्त रख दिया गया.
जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम बेदार हुए तो आप ने अपने सर के पास हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा को बेते हुए पाया
पूछा की कौन हो उन्होने कहा की मे औरत हू,
फिर आपने कहा तुम्हे क्यू पएडा किया गया तो उन्होने अर्ज़ किया ताकि मुज़से सुकून हासिल करो,
फरिश्तो ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के इल्म का इंतेहाँ लेने के लिए पूछा ये कौन हे.
आप ने फरमाया ये औरत हे,फिर उन्होने पूछा इशे अमराट(औरत) क्यू कहा गया हे.
तो आपने फरमाया क्यूकी ये मररा(मर्द) से बनी हे,फिर उन्होने सवाल किया इस का नाम क्या हे.
आप ने फरमाया हवा,फिर उन्होने कहा इस का नाम हाव्वा क्यू रक्खा गया.
आपने फरमाया की ज़िंदा चीज़ को ‘हे’ कहा जाता हे, ये भी ज़िंदा से पएडा हुए इस लिए इसका नाम हाव्वा रखा गया”
एक रिवायत के मुताबिक हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा की पएदइश फरिश्तो के सजदो के बाद जन्नत मे हुए और दूसरी रिवायत के मुताबिक हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का जिस्म ज़मीन मे तैयार किया गया
और उस मे रूह को दखल भी ज़मीन मे ही किया गया, और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा की पएदइश भी ज़मीन पर ही हुई फिर दोनो को जन्नत मे ले जया गया.
(रूहुल मा’आनी, जिल्द-1, साफा-233, 234)(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-62)
शैतान की दरख़्वास्त और उसकी मौत
“बोला मूज़े फुरशट दे उस दिन तक की लौग उठाए जाए, फरमाया टुजे मोहल्लात हे, बोला तू किस्म इसकी की तूने मूज़े गुमराह किया मे ज़रूर तेरे शिधे रास्ते पर उनकी ताक मे बेतुंगा,
फिर ज़रूर मे उनके पास अवँगा उनके आयेज और उनके पीछे और उनके दयने और उनके बाए से और तू उन मे से अक्सर को सुक्रगुजार नही पाएगा”(सुराह आ’अरफ़)
शैतान ये मोहल्लात लोगो के उठाए जाने तक तलब करना चाहता था की मौत की शख़्ती से बच जाए, लेक़िन साइटान की ये बात तो ना मानी गयी, अब बला पहली मर्तबा सूर फूँक ने तक उसको मोहल्लात दी गयी,
पहली मर्तबा सूर फूँक ने पर साइटान भी मारजाएगा अलबत्ता उस वक्त तक उशे मोहल्लात हे की वो चारो तरफ से घेरा डाल कर इंशनो के दिलो मे वास्वासे डालता रहे.
और उन्हे बातिल राह की तरफ माइल करता रहे और कुछ लोगो को इटा’अट से रोके और गुमराही मे डाल सके,
अगरचे शैतान की सभात और बदाइयो मे वाकई करने का पक्का इरादा कर चुका था और उशे उम्मीद भी थी.
की वो अपनी मक्षद मे कामयाब होगा लेक़िन फिर भी उसने कहा की तू इन मे से अक्सर को शुक्र गुज़ार नही पाएगा, दूसरे मकाम पर साइटान ने नेयक लोगो पर अपना दाव च्लने से आज़िज़ होने का यू ज़िक्र किया,
“बोला आय रब्ब मेरी किस्म इसकी के तूने मूज़े गुमराह किया मे उन्हे ज़मीन मे बलावे दूँगा और ज़रूर मे उन सब को बराह करूँगा मगर जो उनमे तेरे चुने हुए बंदे हे”(सुराह हाज्र)
शीतान ने कहा की मे लोगो पर बुरे आमाल आचे और मजीन करके पेश करूँगा इस तरह वो मेरे बहकाने से सीधी राह हट जाएँगे,
अलबत्ता आय अल्लाह तेरे नेयक मखलूस और बरग़ुजीदा बंडो पर मेरी दरगुलाने का कोई असर नही होगा, अल्लाह ता’आला ने भी साइटान
को बता दिया था,
“बेशाक़ जो मेरे बंदे हे उन पर तेरा कुछ काबू नही”(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-58, 59)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का निकाह और माहेर
जब हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा को पएडा किया गया तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने उनकी तरफ मिलान करना चाहा और इरादा फरमाया की दस्ते मोहब्बत बदाए,
तो फारिस्टो ने कहा, आय आदम ठहर जाव पहले ‘मेहर’ आड़ा करो,आप ने फरमाया वो ‘माहेर’ क्या हे.
फरिश्तो ने कहा ये की तुम मुहम्मद सललाल्लाहू अलैही वासल्लं पर डूरुद पढ़ो..(सुभानअल्लाह)
एक रिवायत मे 3 मर्तबा और एक मे 17 मर्तबा डूरूड़े पाक पढ़ने का हुक़म दिया गया,
यानी इस मसले मे इत्तेफ़ाक हे की आदम अलयहेसलाम का माहेर यही था की मुहम्मद सललाल्लाहू अलैही वासल्लं पर डूरुद पाक पढ़े,
आप ने डूरुद पढ़ा और फारिस्टो की गवाही से निकाह हुआ..(हसिया जललें, साफा-8)
दूसरी रिवायत के मुताबिक हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा को निकाह के बाद फारिस्ते सोने(गोल्ड) के तख्त पर बिता कर इस तरह जन्नत मे ले गये,
जिस तरह बादशाहो को इज़्ज़त के खातिर उठा कर ले जाते हे, गोया की बारात के वापिशी पर फारिस्ते सोनेरी डॉली मे दोनो मिया-बीबी को उठा कर ला रहे हे.
(रूहुल मा’आनी, जिल्द-1, साफा-234)(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-62)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा का दरख़्त को खाना :-
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को जब फरिश्तो ने सजदा कर लिया तो आप और आप की जॉवजा(हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा) को जन्नत मे रहने का हुक़म हुआ.
और इर्साद हुआ की आप यहा जो चाहे बा-फरगत खाए लेक़िन उस दरख़्त के करीब ना जाए और इर्साडे इलाही हे की
“और उस दखत के करीब ना जाना की हद से बाड़नेवालो मे से हो जाओगे”(सुराह बक़रा)
शेतान का वास्वासा
“सेितान ने उन्हे इस दखत के ज़रिए फिसलया और जहा वो रहते थे वाहा से उन्हे अलग कर दिया”
(सुराह बक़्का)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा के लिए ये हुक़म था की उस दरख़्त के करीब ना जाना,
सेितान ने उंशे उस फरमाने इलाही की ना-फरमानी करना चाहा इसलिए वास्वासे की ज़बान मे दोनो से कहा की मे तुम्हे एसा दरख़्त ना दिखौ जिसके खाने से तुम हमेशा जन्नत मे रहो.
और तुम्ही एसा बादशाह नसीब हो जाए जिस मे कभी किशी किस्म की कमज़ोरी पएडा ना हो,
साइटान ने उनके दिलो मे बार बार वास्वासा पएडा किया और वास्वासे की ज़बान मे किस्म खा कर उनको कहा.
की मे तुम्हारा खेर-ख्वाह हू उस दखत के खाने से तुम्हारे रब्ब ने सिर्फ़ इस लिए तुम्हे रौका की तुम फारिस्ते ना हो जाओ या हमेशा तुम्हे जन्नत मे रहेना नसीब ना हो जाए,
आख़िर कार धोके से उन्हे इस दरख़्त के खाने पर आमडा कर लिया और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा ने दरख़्त से खा लिया.
और खाते ही उनका जन्नति लिबास उनसे उतार गया और जन्नति दरखतो के पत्तो से अपने अपने जिस्मो को धंपा, और वो जन्नत से ज़मीन की तरफ उतार दिए गये.(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-65)
 हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा का ज़मीन पर तसरीफ लाना :-
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम सारणदीप(श्री लंका) मे उतरे गये और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा को ‘जिद्दा’ मे और सेितान को पहले ही दुनिया मे उतार दिया गया था
(रूहुल मानी, जिल्द-1, साफा-236)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जब ज़मीन पर तसरीफ लाए तो आप का जन्नति लिबास उतार लिया गया था और जन्नत के दरखतो के पत्ते अपने जिस्म पर ढांप कर तसरिफ लाए,
हज़रत अली रादियल्लाहो ता’आला अनहो फरमाते हे की हिन्दुस्तान की ज़मीन इस लिए उम्दा और हरी भारी लौंग(लविंग) वगेरा इस लिए वाहा पर पएडा होते हे.
की हज़रत आदम अलैहिस्सलाम  जब इस ज़मीन पर आए तो उनके जिस्म पर जन्नति दरख़्त के पत्ते थे वो पत्ते हवा से उड़ कर जिस दरख़्त पर पहॉंछे वो हमेशा के लिए खुसबुदार हो गये.
(तफ़सीरे नयमी, जिल्द-1, साफा-284)
(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-74)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जन्नत से क्या लाए :-
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जन्नत से मुख़्टेलफ किस्म के बिज़ और 3 किस्म के फल और हज़रे असवद(साया पत्थेर जो खाना ए काबा मे लगा हुआ हे) और वो आसा जो बाद मे मूसा अलयहेसलाम के हाथ आया.
जिस की लंबाई 10 गाज थी अपने साथ ले कर आए थे और कुछ सोना, चाँदी, और कुछ खेती बाड़ी वगेरा के औजार भी साथ लाए,
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम इस कद्र गिरया वा जारी मे मासगुल हुए की उन तख़मो से बेख़बर हो गये, सेितान ने मौका पा कर उनको अपना हाथ लगा या जब तखम पर उसका हाथ लगा वो ज़हरीला हो गया जो उस के हाथ से महफूज़ रहा उसका ऩफा बरकरार रहा,
सैईयएडना आदम अलयहेसलाम के साथ 3 किस्म के जन्नति मेवे आए,
1 वो जो पूरे खा लिए जाते हे,
2 वो जिनका उपर का हिस्सा खा लिया जाता हे और गुटली फेंक डू जाती हे, जेशे खजूर, आम वगेरा..
3 वो जिनका उपर का छिलका फेंक दिया जाता हे और अंधूनि हिस्सा खा लिया जाता हे.
रिवायत मे हे की उनके साथ लोहे की औजार भी थे
1 सांशी जिसे लोहा पकड़ते हे
2 हात्ोड़ा,
हज़रत असवद जब जन्नत से आया तो उसकी रोशनी कई मिल तक जाती थी जहा उसकी सा’आई पहॉंछती थी उस हड्द तक हराम सरीफ़ की हादे कायम हुई.(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-75)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अलैहिस्सलाम की टोबा का वक़ीया इन उर्दू हिन्दी हज़रत हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अलयहेसलाम की तौबा :-
“फिर शिख लिए हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने अपने रब्ब से कुछ कालमे तो अल्लाह ता’आला ने उसकी तौबा कबूल की बेशाक़ वोही हे बहोट तौबा कबूल करनेवाला माहेरबान(सुराह बकरा, आयात-37)
वो तौबा के कलमत क्या थे, अहले इल्म से चाँद अक़वाल मँकौल हे
1) “रब्बाना ज़ालमना अन्फॉषना वेन लाम तागफ़ीरलना वरहम्ना लानाक्कुंान्ना मीनल ख़ासेरीन”
2) “सुभनकल्लाहुंमा वाबेहंडेका वातमारकास्मोका वा ता’आला जद्डॉक़ा वलाल्लाहा गेऋूक”
3) “सुभनकल्लाहुंमा वाबेहंडेका अमीलटो सू’आन वज़लांटो नफशी फगफ़ीरली इन्नका खेउल गाफ़ेरीन”
4) एक कौल ये हे की हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अलयहेसलाम ने साक अर्श पर मोहम्मद रसूल्लाल्लाह सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं लिखा हुआ देयखहा तो उन्होने इशी इज़म मुबारक को अपनी साफा’अट का ज़रिया बनाया(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-77)
4 कौल के मुताबिक ये हदीस ए नब्वी हे
हुज़ूर सर्वारे क़ाएनआत सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं ने फरमाया जब हज़रत हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से ख्ता हुई तो
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ की
“आय मेरे रब्ब आज़्ज़वज़ल मे महामड सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं के वसीले से तूज़ से माफी का तलबगार हू”
अल्लाह ता’आला ने इर्साद फरमाया आय हज़रत आदम अलैहिस्सलाम तूने मोहम्मद (सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं) को केशे जाना हालाँकि मेने उन्हे पएडा भी नही किया तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अलयहेसलाम ने अर्ज़ की आय मेरे रब्ब आज़्ज़वज़ल जब तूने मूज़े अपने दस्ते क़ुद्रट से पएडा फरमाया और मेरे अंदर रूह डाली तो मेने अपना सर उठाया और अर्श के पायो पर
“लाल्लाहा इल्लाल्लाह मोहम्मडूर रसूल्लाल्लाह”
लिखा हुआ देयखहा तो मेने जान लिया की जिस का नाम तूने अपने नाम के साथ जोड़ा हे यक़ीनन मखलकात मे से ज़्यादा अज़ीज़ हे,
अल्लाह ता’आला ने फरमाया आय हज़रत आदम अलैहिस्सलाम तूने सच कहा बेशाक़ वो (यानी हुज़ूर सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं) मूज़े मखलकात
मे से सब से ज़्यादा प्यारे हे तुमने उशी महबूब के वसीला से मूज़े पुकारा पास मेने तुम्हे माफ़ फ़ार्मा दिया और अगर मोहम्मद (सललाल्लाहो अलयहे वासल्लं) ना हो ते तो मे तुज़े पएडा ना करता”(अल मुस्ताद्रक, ख्सासुल कुबरा, मावहिबबुल लाड़ुनिया)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा किस दिन क़बूल हुए :- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा जुम्मा को क़बूल हुई, आप की पएदइश और जन्नत से बाहर तसरीफ लाना भी जुम्मा का दिन ही था और वो आशूरा था (यानी 10 मोहर्रम का दिन)(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-78)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का ज़रिया ए मा’आश्
तफ़सीरे अज़ीज़ी मे हे की सबसे अव्वल कपड़ा बुनने का काम हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने किया और बाद मे खेती-बाड़ी के काम मे मशगूल रहे,
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अलयहेसलाम ने कुवे का पानी कभी नही पिया बल्क़ि आप हमेशा बारिश का पानी पिया करते थे, और
सब से पहले हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने चाँदी से रुपए और सोने से अशरफिया बनाई.(ताज़किरतुल आमबिया अलयहेसलाम, साफा-76)
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अलयहेसलाम और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा की मुलाकात :-
जब ज़मीन पर तसरिफ लाए तो हज़त हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हिन्दुस्तान के इलाक़ा स्रन्दीप (श्री-लंका) के पहाड़ पर उतरे और हज़रत हाव्वा रादियल्लाहो ता’आला अँहा जिद्दा मे,
तौबा क़बूल होने के बाद दोनो की मुलाकात आरफात(मेडाने आरफात) के मकाम पर हुई, दोनो ने एक दूसरे को पहचाना इस लिए उस मएदान को आरफात कहते हे यानी पहचानने की जगह,
जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जन्नत से आए थे तो उन से अरबी ज़बान भी ले ली गयी थी यानी भुला दी गयी थी इतने रौज़ तक सीरयानी ज़बान मे कलाम फरमाया, तौबा क़बूल होने के बाद अरबी ज़बान फिर आता हुई,
फिर हज़रत जिबराल ने तमाम आलम के जानवरो को आवाज़ दी की आय जानवरो हक़्क़ ता’आला ने तुम पर अपना खलिफा भेजा हे उस की इटा’अट और फार्मबरदारी करो, दरयाई जानवरो ने सर उठा कर
इटा’अट जाहेर की और खुसक के जानवरो आप के आस-पास जमा हो गये, हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अलयहेसलाम उन पर हाथ फेरने लगे,
जिस पर आप का हाथ मुबारक पहॉंच गया वो अहली और खानगी बन गये जेशे घोड़ा, उनत, बकरी, कुत्ता, बिल्ली, वगेरा और जिस पर आप का हाथ ना पहॉंचा वो जंगली वा हस्सी रहा जेशे हिरण वगेरा.(ताज़किरतुल अंबिया अलयहेसलाम, साफा-79)