रजब की फ़ज़ीलत इन हिंदी रजब की दुआ इन हिंदी रजब का महीना

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RAJAB KI FAZILAT

”रजब की फ़ज़ीलत” इन हिंदी “रजब की दुआ” इन हिंदी रजब का महीनारजबुल मु-रज्जबनबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि रजब के महीने की बड़ी फजीलत है। इस महीने की अिबादत बहुत अफजल है।

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : जब रजब के महीने का चाँद देखो तो पहले एक मर्तबा यह दुआ पढो.

रजब की दुआ इन हिंदी

अल्लाहुम्मा बारिक लना फी र-ज-ब व शबा-न व-बल्लगना इला शरि र – मज़ा- न
नफ्ल नमाज़:

रजब की फ़ज़ीलत इन हिंदी रजब महीने की पहली रात में ईशा की नमाज के बाद दस रक्अन नमाज पाँच सलाम से पढे।

हर रकात में सुर फातिहा के बाद सूर काफिरून तीन-तीन मर्तबा और सूर इखलास तीन मर्तबा पढ़े।अल्लाह ने चाहा तो इस नमाज पढने वाले को अल्लाह पाक कयामत के दिन शहीदों में शामिल करेगा.

 और उसके हजार दर्जे बुलंद करेगा।

रजब की दुआ इन हिंदी

लाइला-ह इल्लल्लाहु वह – दहू ला शरी-क लहू लहुल मल्कू व लहुल हम्दु वयु मीतु व हु-व हय्युल ला यमूतु बि- यदिहिल खेरु वह -व अला कुल्ली शैइन कादीर

+ अल्ला हमा लमानी – आ लिमा आइता -त तला मुअती-य लिमा म-न-त वला यन-फअ जल-जदिई अला कुल्लि शैइन कदीर + अल्लाहम्म ला मानि-अलिमा में- कला जदु.

रजब की इबादत


पहली रात को ईशा की नमाज के बाद चार रकात नमाज दो सलाम से पढ़े। हर रकअत में सुर फातिहा के बाद सूर इन्शिराह एक बार सूर इखलास एक बार सुर फलक एक बार और सूर नास एक आर पढे।

 जब दो रकअत का सलाम फेर दे तो कलिम-ए-तोहीद 33 बार, दरूद शरीफ 33 बार पढ़े। फिर दो रकअत की निय्यत बांध पेहली पहली दो रक्अत की तरह पढ़े

 फिर सलाम के सलाम के कलमा ए- तोहीद 33 मर्तबा ओर दुरुद शरीफ 33 मर्तबा पढ़कर अपनी जो भी हाजत हो अल्लाह से मांगे। अल्लाह ने चाहा तो हर हाजत पूरी होगी।


रजब की पहली तारीख को जूमा की नमाज के बाद दो रकात नफ्ल की पड़े। हर रकअत में सूरह फातिहा के बाद सूर इखलास 5-5 मर्तबा पढे।

सलाम के बाद अपने पिछले गुनाहो से तौबा करे अल्लाह ने चाहा तो इस नमाज के पढने वाले के गुनाह माफ हो जायेगे

 और उसकी मगफिरत हो जायेगी।

रजब की इबादत खास जुमा की


रजब महीने की जुमा की हर रात को इशा की नमाज के बाद दो रकअत नफ्ल की पढ़े। पहली रकअत में सूरह फातिहा के बाद सुर ब-क-र का अन्तिम रुकुअ “आ- म-नर्रसुलू” से “काफिरीन” तक सात मर्तबा पढ़े।

 फिर दूसरी रक्अत में सूरह फातिहा के बाद सूर हश्र की अन्तिम आयतें *हु-वल्लाहुल्लजी” से “हाकीम” तक सात मर्तबा पढे।

 फिर सलाम फेरने के बाद अल्लाह से जो भी मांगेगा उसकी वह हाजत पूरी होगी। हर मुराद के लिये यह अफजल नमाज है।

लै लतुर्रा गायब : यह रात इसी महीने में आती है महीना के पहले जुमा की रात का नाम है

इस रात में मग्रिब की नमाज के बाद 12 रकअत नफ्ल की छ सलाम से अदा करे। हर रक्अत में सूर फातिहा के बाद सूर कद्र तीन बार और सूर इख्लास 12 मर्तबा पढे। सलाम फेरने के बाद सत्तर मर्तबा इस दुरूद को पढ़ें।

अल्लाहुम्म सल्लि अला मु-हम्मदि निन्नबिध्यिल् उम्मी व- अला आलिही व-सल्लिम्

फिर सज्दा में जाकर 70 मर्तबा इसे पढे

सब्बुहुं कुद्दुसुन रब्बुल मलाईकती वर्रूही

फिर सर उठाये और नीचे की दुआ को 70 मर्तबा पढें

रबिग फिर वर्- हम व-तजा-वज् अम्मा त-लमु इन्न-क अन्त् अरजुन् अञु-जमु
फिर दूसरा सज्दा भी इसी प्रकार करें, फिर जो भी माँगेगा वह कुबूल होगा।

रजब महीने के पहले जुमा को जुहर और अस के दर्मियान चार रक्त नमाज एक सलाम से पढ़ें।

 हर रक्अत में सूरः फातिहा के बाद आयतल कुर्सी सात मर्तबा, सूर इख्लास पाँच मर्तबा पढ़े। फिर सलाम फेरने के बाद 25 मर्तबा यह दुआ पढ़े।

लाहो-ल वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल कबीर मु-तआलि

फिर 100 मर्तबा यह इस्तिगफार पढ़े।

अस्- अस्तागफिर अल्लाह लाइला-ह इल्ला हु-व अला-हय्यूल हकय्यूमु गफ्फारुज्जुनूबिव-सत्तारुल अयूबि व-अतूबु इलैहि

इसके बाद 100 मर्तबा दरूद शरीफ पढ़कर जो भी दुआ करे, चाहे दीनी हो या दुनियावी, अल्लाह ने चाहा तो जरूर कुबूल होगी।


रजब माह की 15वी रात को बाद नमाज इशा दस रकम नमाज़ पांच सलाम से पदे। हर रकअत में सूरह फातिहा के बाद सूर है इख्लास तीन-तीन मर्तबा पढे। फिर सलाम के बाद यह दुआ पढ़:

रजब की दुआ इन हिंदी

ला इला-ह इल्लल्लाह वह-दह ला शरी-क लहू लहुल् मुल्कु व लहुल हम्दु युहयी वयु मितु व-हु-व हय्युन् ला यमूतु बि-यदिहिल खैर, व हु-व अला कल्लि शैइन कदीर + इला- हव्वा -द् अ-ह-दन, स- म-द, फ-दै, व-त-रन् लम् यत्तखि साहि-ब-तब
व-लदा

इस नमाज के पढ़ने वाले के गुनाह ऐसे झड़ेंगे जैसे दरख्त से सूखे पत्ते झड़ जाते हैं।
रजब महीने के किसी जमा की रात को इशा की नमाज के बाद दो रक्अत नफ्ल की नमाज पढे।

 दो रकअत में सूरः फातिहा के
बाद आयतल कुर्सी ग्यारह मर्तबा, सूर: जिल्जाल ग्यारह मतबा, सूरः तकासुर ग्यारह मनाबा पढ़े।

फिर सलाम फेरने के बाद अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी माँगे। अल्लाह ने चाहा तो इस नमाज के पढने वाले के तमाम गुनाह माफ करके उसको बख्श देगा।
27 वी रक्त में पढ़े.

२७ रजब की नमाज़ और इबादत

मेराज की रात में नफ्ली नमाज़ : रजब महीने की रात को 12 रक्अत नमाज तीन सलाम से पटे। पहली चार में सूर फातिहा के बाद सूर कर तीन-तीन मर्तबा हर रवअत और सलाम फेरने के बाद सत्तर सेवा यह दुआ पदे

लाइला- इल्लल्लाहुल मलिकुल हक्कुल मुबीन दूसरी चार रक्अत में सूरह फातिहा के बाद सूर नही तीन तौन मर्तबा हर रक्अत में पढ़े और सलाम फेरने के बाद 70 मर्तबा यह दुआ पढ़े


इन्न-के कविय्युन, मुआीनुन वाहिदुन दनीलुन बि-हविक इख्या- क नअबुदु व इय्या- क नू – तनु तीसरी चार रक्अत मर्तबा हर रक्स में पढे। इनशा-अल्लाह तआला जो हाजत होगी सूर, फातिहा के बाद सूर इस्लामी तीन-निन पूरी होगी।

रजब महीने की 27 तारीख को जुहर की नमाज के बाद चार रकअत नफ्ल एक सलाम से पड़े। पहली रकअत में सूर फातिहा के बाद सूरह कद्र तीन मर्तबा।

दूसरी रकअत में सूरह फातिहा के बाद सूर3 क्लास तीन मर्तबा, तीसरी में सूरह फ-लक तीन मर्तबा, चोथी में सूर नास तीन मर्तबा पढ़े। सलाम फेरने के बाद दरूद शरीफ 100 मनबा पढे। यह नमाज हर मुराद के लिये बहुत अफजल है।

रजब महीने के आखिर में दस रकअते पाँच सलाम से पढे। हर

रक्त में सूरः फातिहा के बाद सूर का फिस्न तीन बार, और सूर क्लास तीन मितवा पढे, फिर सलाम फेरने के बाद हाथ उठाकर यह मुबारक दुआ पढ़े।

लाइला-ह इल्लल्लाहु वह- दहु ला शरी-क लहू लहुल मुलकु व- लहुल हम्दु युही वयुमीन् वहु-व हप्युन ला यमूतु बि-यदिहिन् वैरू, बहु-व अला कुल्लि शैइन कदीर् + व-सल्लल्लाहु अला सय्यिदिना मु- हम्मदिन् व- अला आलि मित्ताहिरी-न + बना हो-ल वला कव्व-त इल्ला चिल्लाहिन् अनिथ्य न् अजीमि०)


फिर अपने रब से अपनी हाजत मागो। तुम्हारी दुआ कुबूत होगी और अल्लाह पाक तुम्हारे और राजस्व के ध्यान सत्तर ्वन्दक सवाई) रुकावट के लिये कर देगा

ओर हर खाई की चोडाई 500 वर्ष की होगी। निकलेगा। यह हदीस जब सलमान रजि0 ने नुनी तो रोने लगे और इनने सवाब मिलने के शुक में सज्दे में गिर पड़े।

 और हर रकअत के बदले एक हजार रवअन का सवाब मिलने के शक में सज्दे में गिर पड़े।


वज़ीफ़ा तीन मर्तबा

रजब महीने  इस महीने की पहली तारीख से हर नमाज के बद

इस दुआ को पढ़ने की बही फजीलत आनो है। अस्- तफिरुल्ला-हल अजी-मल्लजी लाइला- इलाहु-कन

हय्युल् कप्यूम + इलेहि तो-बनु अवृदिन् जालिमिन न प्ुलि- कु नफ- सह जरव्वला नफ-अन् वला मो-नन् ना ह य म् बर नुशूर


उस माह की 15 तारीख का किसी नमाज के बाद एक मतंबा नीचे दुआ पदना अपजल है। इस दुआ के पटने में ना उनकी तमाम बुराइयों को मिटा कर नेकिये में बदल देगा।

असनगफिरुल्ला-हल्लजी ला इला-ह इल्ला ु-प एन-एन दश्यूमु] गफ्फारुज्जुनूवि, सत्नार्त अयूवि व- अनुहदलेह


नफ्ली रोजा : नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नेफरमाया : रजब महीने के रोजो की बड़ी फजीलत है। ओर सबसे

अधिक 27 के रोजे का बड़ा सवाब है। इस दिन रोजा रखने से कव के अजाब और दोजख की आग से सुरक्षित रहेगा। इस माह के एक रोजे का सवाब

और दिन के हज़ार रोजों के सवाब के बराबर है।

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